March 8, 2026

“एडवांस डिप्लोमा इन पंचगव्य थेरेपी” (ADPT – MD Panchgavya)

पंचगव्य प्रशिक्षण कि अधिक जानकारी

आवेदकों के लिए जानने युक्त जानकारी

नामांकन (Admission Form) के बाद पढाई के लिए तीन प्रायोगिक कक्षा के सेमिनार जो की क्रम से 5, 5 और 7 दिनों के होंगे. हर सेमिनार के बीच ३-५ महीने का अंतर होगा. जिसमें सभी में भाग लेना आवश्यक होगा. पहले के दो सेमिनार विस्तार केन्द्रों पर होगा. तीसरा सेमिनार जिसके साथ परीक्षा भी होती है वह निमशिरगाव (कोल्हापुर-सांगली) स्थित मुख्य गुरुकुल के परिसर में होगा. उसके बाद २ दिन का एक कार्यक्रम भारत भर के सभी विस्तार केन्द्रों (गुरुकुलों) के विद्यार्थियों का सामूहिक रूप से अलग – अलग प्रदेशों में (स्थानों) आयोजित कीया जाता है.

  •  कुल 172 घंटे की पढाई / प्रक्टिकल्स होगी. इसमें कुल मिला कर लगभग 1 वर्ष का समय लगता है.
  •  उतीर्ण विद्यार्थी ”गव्यर्षी” कहलायेंगे. जिनके लिए दीक्षांत समारोह “वैदिक पंचगव्य गुरुकुल एवं अनुसन्धान केंद्र” भारत के किसी भी राज्य में आयोजित करेगा. जहाँ ” गव्यर्षी” को दीक्षांत किया जायेगा.
  •  गव्यर्षी को अपने मरीजों के लिए पंचगव्य की औषधियों के निर्माण का पूर्ण अधिकार होगा.

इसके बाद गव्यर्षी को 1 वर्ष तक चिकित्सा अभ्यास गुरुकुल के किसी आचार्य के सानिध्य में करना होता है. इसके लिए गव्यर्षी अपने गृह क्षेत्र में ही रह कर ऑनलाइन व्यवस्था के तहद गुरुकुल के आचार्य के सानिध्य में चिकित्सा अभ्यास कर सकते हैं. 1 वर्ष के चिकित्सा अभ्याश पूरा होने के बाद पूर्ण ‘गव्यर्षी‘ कहलायेंगे और उन्हें वैदिक पंचगव्य गुरुकुल की ओर से अभ्यास पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा. गव्यर्षी यदि प्रोफेशनल रूप में मेडिकल अभ्यास करना चाहते हैं तो रजिस्ट्रेशन करा कर विश्व में कहीं भी चिकित्सा अभ्यास कर सकते हैं. (जिन देशों में भारत की शिक्षा को मान्यता प्राप्त है.) और अपने नाम के साथ गव्यर्षी भी लिख सकते हैं. जैसे “गव्यर्षी नितेश ओझा” (MD) PT – AM

Satra 1

पंचगव्य परिचय 

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक 
प्रैक्टिकल 100 अंक = 60 – ज्ञानकोष + 40 पंचगव्य प्रशिक्षण केन्द्रों पर गोसेवा कार्य

शामिल विषय (Topics):
  • 1 गऊमाता एवं उनके गव्यों का उद्भव।
  • 2 मनुष्य जीवन और उसके उद्देश्य।
  • 3 गऊमाता एवं गव्य पुराण।
  • 4 गव्यों के प्रकार।
  • 5 गऊमाता के प्रकार।
  • 6 विभिन्न प्रकार के गऊमाताओं के गव्यों के प्रकार।
  • 7 गऊमाता एवं काऊ में अंतर।
  • 8 गव्यों के संग्रह के लिए गऊमाताओं का प्रशिक्षण। – प्रयोगिक कक्षा
  • 9 गव्यों के संग्रह के लिए ग्रह और उपग्रहों की स्थिति।
  • 10 श्रेष्ठ गव्य संग्रह के लिए गऊमाता को जैविक चारा।
  • 11 गऊमाता के शरीर में ऊर्जा संग्रह का विज्ञान।
  • 12 लुप्त हो रही गोमाता के गव्यों से अद्भूत चिकित्सा
आप क्या सीखेंगे (What You’ll Learn):
  • भारतीय पौराणिक निदान शास्त्र ज्ञान
  • पारंपरिक चिकित्सा विज्ञान

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Satra 2

पंचगव्य का औषध के रूप में निर्माण 

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक 
प्रैक्टिकल 100 अंक = 60 – औषध निर्माण के नमूने + 40 अपने घर की गोमाता की सेवा की

शामिल विषय (Topics):
  • 1 गव्यों का संग्रह कैसे करें। – प्रयोगिक कक्षा
  • 2 गव्यों का रख – रखाव। – प्रयोगिक कक्षा
  • 3 गव्यों में जलिय अंश की व्याख्या। ♦ दूध ♦ गौमूत्र ♦ गोबर (गोमय) ♦ मट्ठा ♦ घी
  • 4 गव्यों में छारीय अंश की व्याख्या। ♦ दूध ♦ गौमूत्र ♦ गोबर (गोमय) ♦ मट्ठा ♦ घी
  • 5 गव्यों के साथ जड़ी- बूटियों का मिश्रण। – प्रयोगिक कक्षा
  • 6 गौमूत्र के वाष्पिकरण की विधियां। – प्रयोगिक कक्षा
  • 7 गौमूत्र छार से विभिन्न प्रकार की घनवटियों का निर्माण। – प्रयोगिक कक्षा
  • 8 गौमूत्र छार से मलहम का निर्माण। – प्रयोगिक कक्षा
  • 9 अम्लिय विधि से गौमूत्र औषध का निर्माण। – प्रयोगिक कक्षा
  • 10 छिड़कने योग्य पंचगव्य औषध का निर्माण। – प्रयोगिक कक्षा
  • 11 चूर्ण रूप में पंचगव्य औषध का निर्माण। – प्रयोगिक कक्षा
परियोजना :

पूर्ण रूप से अभ्यास के लिए आप को तैयार करना.

आप क्या सीखेंगे (What You’ll Learn):
  • भारतीय पौराणिक निदान शास्त्र ज्ञान
  • पारंपरिक चिकित्सा विज्ञान

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Satra 3

पंचगव्य का औषधिय  उपयोग 

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक 
प्रैक्टिकल 100 अंक = 60 – महासम्मेलन में उपस्तिथि + 40 – अपने जिला की गोशाला में गोसेवा

शामिल विषय (Topics):
  • 1 मानव शरीर रचना विज्ञान।
  • 2 मानव शरीर क्रिया विज्ञान।
  • 3 मानव शरीर में रोगों की पहचान।
  • 4 नाडी विज्ञान का परिचय।
  • 5 नाडी विज्ञान में अभ्यास। – प्रयोगिक कक्षा
  • 6 नाभि विज्ञान का परिचय। 
  • 7 नाभि विज्ञान में अभ्यास। – प्रयोगिक कक्षा
  • 8 शाकाहार जीवन की श्रेष्ठता।
  • 9 कफ रोगों के लिए पंचगव्य।
  • 10 पित्त रोगों के लिए पंचगव्य।
  • 11 वात्त रोगों के लिए पंचगव्य।
  • 12 संक्रामक रोगों की चिकित्सा।
  • 13 नर-नारी प्रजनन तंत्र के रोग और पंचगव्य से उपचार।
  • 14 बच्चों के रोगों के लिए पंचगव्य।
  • 15 पंचगव्य दिनचर्या के उत्पाद एवं सौंदर्य प्रसाधन। – प्रयोगिक कक्षा
संकाय और विशेषज्ञ :
  • गव्यर्षी नितेशभाई ओझा – मुख्यआचार्य – वैदिक पंचगव्य गुरुकुल

Satra 4

गौशाला रख-रखाव, प्रबंधन एवं शोध 

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक 
प्रैक्टिकल 100 अंक = 60 मोखिक प्रश्न + 40 महासम्मेलन की कक्षा में उपस्थिती 
 नोट – उतीर्ण होने के लिए आवश्यक अंक 50 प्रतिशत

शामिल विषय (Topics):
  • 1 गौशाला वास्तु एवं निर्माण कला।
  • 2 जैविक चारागाह प्रबंधन।
  • 3 दूध संग्रह एवं प्रबंधन।
  • 4 गौमूत्र संग्रह एवं प्रबंधन।
  • 5 गोमय संग्रह एवं प्रबंधन।
  • 6 गऊमाता की चिकित्सा। – प्रयोगिक कक्षा
  • 7 लघु गौशालाओं का प्रबंधन।
  • 8 मध्यम गौशालाओं का प्रबंधन।
  • 9 वृहद गौशालाओं का प्रबंधन।
  • 10 जैविक चारा संग्रह तकनीक। – प्रयोगिक कक्षा
  • 11 जैविक चारा उत्पादन तकनीक। – प्रयोगिक कक्षा
  • 12 जैविक खाद का निर्माण एवं प्रबंधन। – प्रयोगिक कक्षा
  • 13 जैविक कीट खदेडक निर्माण एवं प्रबंधन। – प्रयोगिक कक्षा
  • 14 पंचगव्य उत्पादों की पैकेजिंग। – प्रयोगिक कक्षा
  • 15 गौसेवक एवं गौशाला कार्यालय का प्रबंधन। (प्रात्यक्षिक सहित)
  • 16 गौशाला अभिलेख रक्षण। (प्रात्यक्षिक सहित) – प्रयोगिक कक्षा
संकाय और विशेषज्ञ :
  • गव्यर्षी नितेशभाई ओझा – मुख्यआचार्य – वैदिक पंचगव्य गुरुकुल

Satra 6

चतुर्थ (परीक्षा) सेमिनार (सात दिनों का) 

प्रतिवर्ष अप्रैल और दिसंबर में निश्चित 

  • 1 पूर्व के विषयों का पुनरशिक्षण
  • 2 मस्तिष्क – बनावट, क्रिया प्रणाली और रोग.
  • 3 अधिक संक्रामक रोग और उसका निवारण.
  • 4 नारी प्रजनन तंत्र और रोग निवारण.
  • 5 नर  प्रजनन तंत्र और रोग निवारण.
  • 6 मानव शरीर में उर्जा विज्ञान और उसका कार्य प्रणाली
  • 7.नाडी – नाभि पर उच्चत्तर शिक्षा
  • 8 शरीर में वीर्य / शुक्र उत्पत्ति की क्रिया और उसका संरक्षण  
  • 9 सृष्टि निर्माण को समझें क्वांटम फिजिक्स से.  . 

नोट – 
 1) चारों विषयों की शिक्षा गुरूकुल विस्तार केन्द्रों पर 5-5 दिनों के 2 सेमिनारों में पूर्ण किया जायेगा.

 2) विशेष सेमिनार जिसमें नए – पुराने सभी गव्यर्षी उपस्थित रहते हैं, उसमें पूर्व के विषय जो पाठ्यक्रम में नहीं है, उसकी शिक्षा दी जाती है.

 3) विशेष सेमिनार में नए शोध के विषयों पर विशेषज्ञों के और गुरूजी का उद्बोदन एवं मार्गदर्शन रहता है. 

 4) पिछले वर्ष के सभी शिष्यों का दीक्षांत मंथन समारोह होता है.  

दिनचर्या (How It Works)

17 दिनों के सत्र में 6 विषयों पर उच्चत्तर शिक्षा. 

दिनचर्या इस प्रकार होगी –

  • (क) प्रात: 4.30 बजे से दिन का प्रथम सत्र ब्रह्ममुहूर्त में.
  • (ख) 4.30 बजे से 7.30 तक प्रात: कक्षा,
  • (ग) इसके बाद अल्पाहार, काढ़ा इ.
  • (घ) उसके पश्चात सुबह 8:30 से 9:30 कक्षा.
  • (च) सुबह ९:30 बजे शुद्ध सात्विक जैविक भोजन
  • (छ) सुबह 11 से 12 विशेष व्यवस्थापन कक्षा
  • (ज) 2 बजे से 5 बजे तक प्रायोगिक परीक्षा, इसके बाद सायं भोजन।
  • (झ) रात्रि कक्षा 7 बजे से 9 बजे रात्रि तक।

FAQ

प्रश्न एवं उत्तर (Faqs)

  1. I have done B.Sc, am i eligible for this course? Ans: Yes
  2. Sir what is the course fee and duration? Ans: You can refer to the page for more details. Course fee is 27,900/- (only) duration is about 17 days in a year.
  3. How far is main Gurukul (Nimshirgav) from Sangli or Kolhapur Central? Ans: From Sangli It’s 16 Kms – And From Kolhapur It’s – 23 Kms
  4. Can i make online payment? Ands: Yes
  5. How much is the admission/registration fee and when i need to pay ? – Ans: Admission Fee is Rs. 3100/- 1st Installment Before Admission, 2nd Installment Rs. 9000/- 1st day of 1st Session. 3rd Installment Rs. 15800/- on 2nd Session.

चारों विषयों का शिबिर नुसार होने वाला विश्लेषण

पंचगव्य परिचय (विषय संख्या 1)

प्रथम शिविर (पाँच दिनों का)

1     गऊमाता एवं उनके गव्यों का उद्भव।

2     मनुष्य जीवन और उसके उद्देश्य।

3     गऊमाता एवं गव्य पुराण।

4     गव्यों के प्रकार।

5     योगिक क्रिया मे गाय का महत्व।

दितीय शिविर (पाँच दिनों का)

6     गऊमाता के प्रकार।

7     विभिन्न प्रकार के गऊमाताओं के गव्यों के प्रकार।

8     गऊमाता एवं काऊ में अंतर।

9     गव्यों के संग्रह के लिए गऊमाताओं का प्रशिक्षण।

10    गव्यों के संग्रह के लिए ग्रह और उपग्रहों की स्थिति।

तृतीय शिविर (सात दिनों का)

11     श्रेष्ठ गव्य संग्रह के लिए गऊमाता को जैविक चारा।

12    गऊमाता के शरीर में ऊर्जा संग्रह का विज्ञान।

पंचगव्य का औषध के रूप में निर्माण (विषय संख्या 2)

प्रथम शिविर (चार दिनों का)

1     गव्यों का संग्रह कैसे करें।

2     गव्यों का रख – रखाव।

3     गव्यों में जलिय अंश की व्याख्या।

♦ दूध        ♦ गौमूत्र      ♦ गोबर (गोमय)            ♦ मट्ठा       ♦ घी

4     गव्यों में छारीय अंश की व्याख्या।

♦ दूध        ♦ गौमूत्र      ♦ गोबर (गोमय)      ♦ मट्ठा

दितीय शिविर (पाँच दिनों का)

5     गव्यों के साथ जड़ी- बूटियों का मिश्रण।

6     गौमूत्र के वाष्पिकरण की विधियां।

7     गौमूत्र छार से विभिन्न प्रकार की घनवटियों का निर्माण।

8     गौमूत्र छार से मलहम का निर्माण।

तृतीय शिविर (सात दिनों का)

9     अम्लिय विधि से गौमूत्र औषध का निर्माण।

10    छिड़कने योग्य पंचगव्य औषध का निर्माण।

11     चूर्ण रूप में पंचगव्य औषध का निर्माण।

 पंचगव्य का प्रयोग (विषय संख्या 3)

प्रथम शिविर (पाँच दिनों का)

1     मानव शरीर रचना विज्ञान।

2     मानव शरीर क्रिया विज्ञान।

3     मानव शरीर में रोगों की पहचान।

दितीय शिविर (पाँच दिनों का)

4     नाडी विज्ञान का परिचय।

5     नाडी विज्ञान में अभ्यास।

6     नाभि विज्ञान का परिचय।

7     नाभि विज्ञान में अभ्यास।

8     शाकाहार जीवन की श्रेष्ठता।

तृतीय शिविर (सात दिनों का)

9     कफ रोगों के लिए पंचगव्य।

10    पित्त रोगों के लिए पंचगव्य।

11     वात्त रोगों के लिए पंचगव्य।

12    संक्रामक रोगों की चिकित्सा।

13    नर-नारी प्रजनन तंत्र के रोग और पंचगव्य से उपचार।

14    बच्चों के रोगों के लिए पंचगव्य।

15    पंचगव्य दिनचर्या के उत्पाद एवं सौंदर्य प्रसाधन।

16  परिमितिये चिकित्सा

गौशाला रख-रखाव, प्रबंधन एवं शोध (विषय संख्या 4)

प्रथम शिविर (पाँच दिनों का)

1     गौशाला वास्तु एवं निर्माण कला।

2     जैविक चारागाह प्रबंधन।

3     दूध संग्रह एवं प्रबंधन।

4     गौमूत्र संग्रह एवं प्रबंधन।

5     गोमय संग्रह एवं प्रबंधन।

दितीय शिविर (पाँच दिनों का)

6     गऊमाता की चिकित्सा।

7     लघु गौशालाओं का प्रबंधन।

8     मध्यम गौशालाओं का प्रबंधन।

9     वृहद गौशालाओं का प्रबंधन।

10    जैविक चारा संग्रह तकनीक।

11     जैविक चारा उत्पादन तकनीक।

12    जैविक खाद का निर्माण एवं प्रबंधन।

13    जैविक कीट खदेडक निर्माण एवं प्रबंधन।

तृतीय शिविर (सात दिनों का)

14    पंचगव्य उत्पादों की पैकेजिंग।

15    गौसेवक एवं गौशाला कार्यालय का प्रबंधन।

16    गौशाला अभिलेख रक्षण।

मास्टर  डिप्लोमा इन पंचगव्य थेरेपी के लिए पाठ्यक्रम

1     पंचगव्य परिचय (विषय संख्या 1)

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक
प्रैक्टिकल 100 अंक = 40(रिकार्ड बुक) +40(प्रायोगिक परीक्षा) +20 (पंचगव्य प्रशिक्षण केन्द्रों पर गोसेवा कार्य)

   पंचगव्य का औषध के रूप में निर्माण (विषय संख्या 2)

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक
प्रैक्टिकल 100 अंक = 40(औषध के नमूने) +40(प्रायोगिक परीक्षा) +20 (अपने घर की गोमाता की सेवा)

3    पंचगव्य का औषधिये  उपयोग (विषय संख्या 3)

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक
प्रैक्टिकल 100 अंक = 40(महासम्मेलन में उपस्तिथि) +40(प्रायोगिक परीक्षा) +20 (अपने जिले की गोशाला में सेवा कार्य)

4    गौशाला रख-रखाव, प्रबंधन एवं शोध (विषय संख्या 4)

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक
प्रैक्टिकल 100 अंक = 40(मोखिक प्रश्न) +40(प्रायोगिक परीक्षा) +20 (मंथन में सेवा कार्य)

 नोट – उतीर्ण होने के लिए आवश्यक अंक 50 प्रतिशत

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